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उठ चुका दिल मेरा ज़माने से

रचनाकार: Rani
उठ चुका दिल मेरा ज़माने से उड़ गया मुर्ग़ आशियाने से देख कर दिल को मुड़ गई मिज़गाँ तीर ख़ाली पड़ा निशाने से चश्म को नक़्श-ए-पा करूँ क्यूँकर दूर हो ख़ाक आस्ताने से हम ने पाया तो ये सनम पाया इस ख़ुदाई के कार-ख़ाने से तेरी ज़ंजीर-ए-ज़ुल्फ़ से निकले ये तवक़्क़ो न थी दिवाने से ऐ ‘फ़ुग़ाँ’ दर्द-ए-दिल सुनूँ कब तक उड़ गई नींद इस फ़साने से ~ अशरफ़ अली 'फ़ुगां'
14 09/12/2026

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