अल्फ़ाज़-ए-नज़्म

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चुनिंदा

विशेष शायरी

चाँद जो सहेजता है

चाँद ने सहेजे हैं वो हर राज़ जिन्हें ज़ुबाँ पर लाने से मैं डरता रहा।

रचनाकार: Sana Malik
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Ummeed Ka Diya

اندھیروں میں بھی امید کا دیا جلائے رکھنا ہر رات کے بعد اک صبح آئے رکھنا

रचनाकार: Ahmed Rizvi
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Bahaar Ka Wada

خزاں کے بعد بہار آنے کا وعدہ ہے ہر ٹوٹے دل کو سنورنے کا وعدہ ہے

रचनाकार: Sana Malik
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Sharma Ji

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Mridul

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Sana Malik

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Zara Hussain

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BE-ZARI

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रचनाकार: Roohi

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Sukoon

Sukoon

रचनाकार: Faisal Qadri

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Khwabon Ka Safar

Khwabon Ka Safar

रचनाकार: Sana Malik

4 रचनाएं

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चाँद ने सहेजे हैं वो हर राज़ जिन्हें ज़ुबाँ पर लाने से मैं डरता रहा।

— Sana Malik

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