हमारे बारे में
अल्फ़ाज़-ए-नज़्म एक ऐसा मंच है जहाँ उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी की शायरी एक साथ साँस लेती है।
हम मानते हैं कि हर ज़बान की अपनी एक रूह होती है, और शायरी वो पुल है जो दिलों को जोड़ती है। यहाँ आप शायरी लिख सकते हैं, पढ़ सकते हैं, सुन सकते हैं और उन शायरों से जुड़ सकते हैं जो अपने अल्फ़ाज़ों से दुनिया को महसूस कराते हैं।
हमारा विज़न
हमारा विज़न एक ऐसी दुनिया बनाना है जहाँ हर शायर, चाहे वो नया हो या अनुभवी, बिना किसी भाषा या मंच की बाधा के अपनी बात कह सके। हम शायरों और शायरी दोनों के प्रति गहराई से समर्पित हैं — हर ग़ज़ल, हर नज़्म हमारे लिए किसी की मेहनत और दिल की आवाज़ है। हमारा लक्ष्य है कि अल्फ़ाज़-ए-नज़्म उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी शायरी का सबसे भरोसेमंद और अपनापन देने वाला घर बने।
संस्थापक
Mridul (मृदुल)
संस्थापकमृदुल देव ने अल्फ़ाज़-ए-नज़्म की नींव इस विश्वास के साथ रखी कि हर शायर की आवाज़ सुनी जानी चाहिए और हर लफ़्ज़ को अपना घर मिलना चाहिए। ख़ुद शायरी के एक विद्यार्थी होने के नाते, वे मानते हैं कि सीखना कभी ख़त्म नहीं होता — हर ग़ज़ल, हर नज़्म कुछ नया सिखाती है और हर शायर से कुछ न कुछ पाने को मिलता है। उनका सपना है कि उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी की शायरी बिना किसी दीवार के एक साथ साँस ले सके, और हर नया लिखने वाला भी उतनी ही इज़्ज़त पाए जितनी एक जाना-पहचाना नाम। शायरों और शायरी दोनों के प्रति उनका गहरा समर्पण ही इस मंच की बुनियाद है, और यही सोच हर फ़ैसले और हर नई सुविधा के पीछे काम करती है।
Rahulwoll (राहुलवोल)
सह-संस्थापकराहुलवोल ने सह-संस्थापक के रूप में मृदुल के साथ अल्फ़ाज़-ए-नज़्म को शायरों के लिए एक सच्चा घर बनाने का सफ़र तय किया। वे भी शायरी के एक विनम्र विद्यार्थी हैं, जो हर शब्द में गहराई ढूँढ़ते हैं और हर नई ग़ज़ल में कुछ सीखने की कोशिश करते हैं। उनका मानना है कि हर शायर, चाहे वो नया हो या तजुर्बेकार, सुनने और सराहे जाने का हक़दार है — भाषा, शहर या पहचान चाहे जो भी हो। शायरों की मेहनत और उनकी कला के प्रति उनकी गहरी निष्ठा इस मंच को हर दिन आगे बढ़ाती है, और मंच की हर नई सुविधा के पीछे उनकी यही सोच काम करती है कि तकनीक शायरी की राह में कभी रुकावट नहीं, बल्कि एक सहारा बने।