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अब कहाँ रस्म घर लुटाने की

रचनाकार: ansh
अब कहाँ रस्म घर लुटाने की बर्कतें थी शराबख़ाने की कौन है जिससे गुफ़्तुगु कीजे जान देने की दिल लगाने की बात छेड़ी तो उठ गई महफ़िल उनसे जो बात थी बताने की साज़ उठाया तो थम गया ग़म-ए-दिल रह गई आरज़ू सुनाने की चाँद फिर आज भी नहीं निकला कितनी हसरत थी उनके आने की ~ फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
4 010/6/2026

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