Free VersePhilosophy##bhay#antarman

भय

रचनाकार: vishnu
हवा के चलने से बादल कुछ इधर-उधर होते हें लेकिन कोई असर नहीं पड़ता उस लगातार काले पड़ते जा रहे आकाश पर मुझे याद आता है बचपन में घर के सामने तारों से लटका एक मरे हुए पक्षी का काला शरीर मेरे साथ ही साथ बड़ा हो गया है मेरा डर मरा हुआ वह काला पक्षी आकाश हो गया ~ नरेश सक्सेना
13 09/14/2026

We use cookies to keep you signed in and understand how Alfaaz-e-Nazm is used. Read our privacy policy.