Ghazal

हवा का पैग़ाम

रचनाकार: Rahulwoll
हवा जो चली तो साथ ले गई कुछ बातें जो कहनी थीं तुझसे, अनकही रह गईं रातें मैं खड़ा रहा उसी दहलीज़ पर बरसों शायद लौट आएँ वो गुज़री हुई सौगातें
4 08/24/2026

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