हवा जो चली तो साथ ले गई कुछ बातें
जो कहनी थीं तुझसे, अनकही रह गईं रातें
मैं खड़ा रहा उसी दहलीज़ पर बरसों
शायद लौट आएँ वो गुज़री हुई सौगातें
4 08/24/2026
We use cookies to keep you signed in and understand how Alfaaz-e-Nazm is used. Read our privacy policy.