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ansh
@ansh
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अब कहाँ रस्म घर लुटाने की
रचनाकार: ansh
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आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है
रचनाकार: ansh
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मैं इस उम्मीद पे डूबा कि तू बचा लेगा
मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा अब इसके बाद मेरा इम्तेहान क्या लेगा
रचनाकार: ansh
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मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है
तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते
रचनाकार: ansh
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मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है
मोहब्बत ना-समझ होती है समझाना ज़रूरी है जो दिल में है उसे आँखों से कहलाना ज़रूरी है
रचनाकार: ansh
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