Sharma Ji
@rahul
मृदुल के साथ 'अल्फ़ाज़-ए-नज़्म' को शायरों का सच्चा घर बनाने वाले सह-संस्थापक राहुल शायरी के विनम्र विद्यार्थी हैं। उनका मानना है कि हर शायर सराहे जाने का हक़दार है। कला के प्रति निष्ठा और तकनीक को शायरी का सहारा बनाने की उनकी सोच ही इस मंच को हर दिन आगे बढ़ाती है।
ख़्वाबों को उड़ान दी तो पंख मिल गए जो सोचा था कभी, वो रंग मिल गए
सुबह की पहली किरण ने एक ख़त लिखा हर अंधेरे को रोशनी में बदलने का हक़ लिखा
हवा जो चली तो साथ ले गई कुछ बातें जो कहनी थीं तुझसे, अनकही रह गईं रातें
समंदर से पूछा मैंने तेरी गहराई का राज़ उसने कहा, ख़ामोश रहना ही है मेरा अंदाज़
दोस्ती किसी मज़हब की मोहताज नहीं ये दिल से दिल का रिश्ता है, आवाज़ नहीं
बारिश की हर बूँद में तेरा नाम था हर बादल के पीछे बस एक पैग़ाम था