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Sharma Ji

@rahul

मृदुल के साथ 'अल्फ़ाज़-ए-नज़्म' को शायरों का सच्चा घर बनाने वाले सह-संस्थापक राहुल शायरी के विनम्र विद्यार्थी हैं। उनका मानना है कि हर शायर सराहे जाने का हक़दार है। कला के प्रति निष्ठा और तकनीक को शायरी का सहारा बनाने की उनकी सोच ही इस मंच को हर दिन आगे बढ़ाती है।

Lucknow, India
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ख़्वाबों की उड़ान

ख़्वाबों को उड़ान दी तो पंख मिल गए जो सोचा था कभी, वो रंग मिल गए

रचनाकार: Sharma Ji
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सुबह का पहला ख़त

सुबह की पहली किरण ने एक ख़त लिखा हर अंधेरे को रोशनी में बदलने का हक़ लिखा

रचनाकार: Sharma Ji
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हवा का पैग़ाम

हवा जो चली तो साथ ले गई कुछ बातें जो कहनी थीं तुझसे, अनकही रह गईं रातें

रचनाकार: Sharma Ji
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आइना

आइने में देखा तो ख़ुद को न पहचाना वक़्त ने बदल दिया है हर एक निशाना

रचनाकार: Sharma Ji
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समंदर और मैं

समंदर से पूछा मैंने तेरी गहराई का राज़ उसने कहा, ख़ामोश रहना ही है मेरा अंदाज़

रचनाकार: Sharma Ji
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दोस्ती का रंग

दोस्ती किसी मज़हब की मोहताज नहीं ये दिल से दिल का रिश्ता है, आवाज़ नहीं

रचनाकार: Sharma Ji
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दहेज नहीं, अपनी मेहनत से घर बसाना है।

मेरे घर में दहेज का सामान नहीं, मेरी मेहनत की निशानियाँ होंगी!

रचनाकार: Sharma Ji
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बारिश की दस्तक

बारिश की हर बूँद में तेरा नाम था हर बादल के पीछे बस एक पैग़ाम था

रचनाकार: Sharma Ji
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